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  • Shakuntal

    महाभारत के आदिपर्व में उपलब्ध एक छोटे-से आख्यान पर आधारित महाकवि कालिदास का नाटक ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’ संस्कृत रंगमंच की शास्त्रीय नाट्य-परम्परा का अप्रतिम उदाहरण है, जिसका हिन्दी रूपान्तर सुप्रसिद्ध कहानीकार और नाटककार मोहन राकेश ने 'शाकुंतल' के नाम से वर्षों पहले किया था।संस्कृत की सम्पूर्ण नाट्य-परम्परा में ‘शाकुंतल’ अपने कथ्य एवं संरचना की दृष्टि से एक बेजोड़ नाटक इस अर्थ में भी है कि इसे पढ़कर प ... Leer más

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  • Raat Beetane Tak Tatha Anya Dhwani Natak

    de Mohan Rakesh ...
    मोहन राकेश की प्रति भा कहानी के क्षेत्र में जगमगाने के बाद नाटक के क्षेत्र में विशेष रूप से चमकी थी । चार-तीन पूर्ण तथा एक अपूर्ण-नाटकों के प्रणयन के अलावा उन्होंने अनेक एकांकी, बीज-नाटक तथा ध्वनि-नाटक लिखे जो रेडियो से समय-समय पर प्रचारित हुए । उनके सभी नाटक साहित्य के उसी तरह अंग हैं जैसे कि रंगमंच के, और यहीं उन्होंने हिंदी की परंपरागत नाटक-विधा का नया मार्ग-दर्शन किया ।रात बीतने तक शीर्षक एका ... Leer más

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  • Andhere Band Kamare

    de Mohan Rakesh ...
    वर्तमान भारतीय समाज का अभिजात नागर मन दो हिस्सों में विभाजित है—एक में है पश्चिमी आधुनिकतावाद और दूसरे में वंशानुगत संस्कारवाद। इससे इस वर्ग के भीतर का द्वन्द्व पैदा होता है, उससे पूर्णता के बीच रिक्तता, स्वच्छन्दता के बीच अवरोध और प्रकाश के बीच अन्धकार आ खड़ा होता है। परिणामतः व्यक्ति ऊबने लगता है, भीतर ही भीतर क्रोध, ईर्ष्या और सन्देह जकड़ लेते हैं उसे, अपने ही लिए अजनबी हो उठता है वह, और तब इसे ... Leer más

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  • Aadhe-Adhoore

    de Mohan Rakesh ...
    ‘आधे-अधूरे’ आज के जीवन के एक गहन अनुभवखंड को मूर्त करता है। इसके लिए हिन्दी के जीवन्त मुहावरे को पकड़ने की सार्थक, प्रभावशाली कोशिश की गई है।...इस नाटक की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विशेषता इसकी भाषा है। इसमें वह सामर्थ्य है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके। शब्दों का चयन, उनका क्रम, उनका संयोजन—सबकुछ ऐसा है जो बहुत सम्पूर्णता से अभिप्रेत को अभिव्यक्त करता है। लिखित शब्द की यही शक्ति और उच्चारित ध्वन ... Leer más

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  • Lahron Ke Rajhans

    de Mohan Rakesh ...
    ‘लहरों के राजहंस’ में एक ऐसे कथानक का नाटकीय पुनराख्यान है जिसमें सांसारिक सुखों और आध्यात्मिक शान्ति के पारस्परिक विरोध तथा उनके बीच खड़े हुए व्यक्ति के द्वारा निर्णय लेने का अनिवार्य द्वन्द्व निहित है। इस द्वन्द्व का एक दूसरा पक्ष स्त्री और पुरुष के पारस्परिक सम्बन्धों का अन्तर्विरोध है। जीवन के प्रेम और श्रेय के बीच एक कृत्रिम और आरोपित द्वन्द्व है, जिसके कारण व्यक्ति के लिए चुनाव कठिन हो जाता ह ... Leer más

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  • Ande Ke Chhilke, Anya Ekanki Tatha Beej Natak

    de Mohan Rakesh ...
    आधुनिक हिन्दी नाटय साहित्य और कथा की दुनिया में मोहन राकेश का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी-रंगान्दोलन को एक नई गति और समृद्धि देने में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। ‘अंडे के छिलके : अन्य एकांकी तथा बीज नाटक’ उनके कई प्रयोगधर्मी एकांकियों का संग्रह है। प्रयोगशीलता को मोहन राकेश रंगमंच की भाषा और उसके मानवीय पक्ष की समृद्धि से जोड़कर देखते थे, अर्थात् रंगमंचीय उपकरणों की न्यूनता के बावजूद कठिन ... Leer más

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  • Purvabhyas

    कथाकार-नाटककार मोहन राकेश के बारह आरम्भिक एकांकियों के प्रारूपों का संग्रह है ‘पूर्वाभ्यास’। इसमें संकलित एकांकी मोहन राकेश के सिद्ध नाटककार बनने के पूर्व की रचनाएँ हैं। इनमें हमें नाटककार की रचना एवं संशोधन-प्रक्रिया का पता लगने के साथ-साथ उसकी रंग एवं ध्वनि माध्यमों की गहरी समझ का प्रमाण भी मिलता है।ये एकांकी न केवल हमें एक ऐतिहासिक दौर का ही साक्षात्कार कराते हैं, अपितु स्वयं नाटककार मोहन राकेश ... Leer más

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  • Kanpta Hua Dariya

    de Mohan Rakesh ...
    कश्मीर के सौन्दर्य और प्रेम की रूमानी कहानियों से अलग दरिया में घर बनाकर रहनेवाले एक ग़रीब हाँजी परिवार, उसके सुख-दुःख, संवेदनाओं के टकराव और कठोर जीवन-संघर्ष पर आधारित मोहन राकेश का यह उपन्यास इस अर्थ में भी अलग है कि यह उनके शहरी मध्यवर्गीय रचना-जगत से काफ़ी अलग है।उपन्यास में मोहन राकेश ने स्वयं ‘पूर्वभूमि’ के तहत इसकी रचना-प्रक्रिया पर रौशनी डाली है, जिससे हमें पता चलता है कि वे स्वयं इस कहानी ... Leer más

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  • Natya Vimarsh

    मोहन राकेश हिन्दी के निरीह-से सामान्य नाटककार भर न होकर ‘थिएटर एक्टीविस्ट’ भी थे। इसीलिए उनके ‘नाट्य-विमर्श’ का दायरा केवल नाटक-लेखन और उससे जुड़े सवालों के शास्त्रीय-सैद्धान्तिक विवेचन-विश्लेषण तक ही सीमित नहीं था। उनकी प्रमुख चिन्ता आधुनिक भारतीय रंग-दृष्टि की तलाश/उपलब्धि और उसके विश्व-स्तरीय विकास की थी।यही कारण है कि वह एकांकी, रेडियो नाटक, नाट्यानुवाद और हिन्दी नाटक तथा रंगमंच का ऐतिहासिक विक ... Leer más

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  • Meri Kahaniyan-Mohan Rakesh

    मेरी कहानियाँ-मोहन राकेश

    हिन्दी कहानी को कथा और शैली दोनों ही दृष्टियों से नई दिशा देनेवाले लेखकों में मोहन राकेश का अग्रणी स्थान है। उन्होंने कम ही लिखा परन्तु उनकी अनेक कहानियाँ साहित्य की अमर निधि बन गईं। प्रस्तुत संकलन में उनकी अपने ही द्वारा चुनी हुई कहानियाँ हैं। नये दौर की मेरी अधिकांश कहानियां सम्बन्धों की यंत्रणा को अपने अकेलेपन मेंझेलते लोगों की कहानियां हैं जिनमें हर इकाई के माध्यम से उसके परिवेश को अंकित करने ... Leer más

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  • Global Theatre Anthologies: Classical and Modern Plays from India

    Series series Global Theatre Anthologies
    The power of theatrical performance is universal, but the style and concerns of theatre are specific to individual cultures.India's dramatic literature demonstrates extraordinary range, depth, and sophistication. Thousands of years ago the theory and practice of how to make theatre was detailed in the Natyashastra. As a result, powerful plays were written; and, over time, a multiplicity of ... Leer más

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  • Aakhiri Chattan Tak (Hindi Travelogue)

    आखिरी चट्टान तक

    गोआ से कन्याकुमारी तक की यह यात्रा दिसम्बर सन् बावन और फ़रवरी सन् तिरपन के बीच की गयी थी। यात्रा से लौटते ही मैंने यह पुस्तक लिख डाली थी। उन दिनों हर चीज़ की छाप मन पा ताज़ा थी पूरे अनुभव को लेकर मन में एक उत्साह भी था इसलिए कहीं-कहीं अतिरिक्त भावुकता से अपने को नहीं बचा सका था। ... Leer más

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